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सेवा के संकल्प के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने भरी हुंकार
- 2026-02-06 01:27:25
भारतीय युवाओं के पथ-प्रदर्शक और आधुनिक भारत के आध्यात्मिक चेतना के अग्रदूत स्वामी विवेकानंद की जयंती (राष्ट्रीय युवा दिवस) के अवसर पर आज प्रांत कार्यालय में एक भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु "युवाओं की सेवा कार्य में भूमिका और स्वामी विवेकानंद का विजन" रहा। गोष्ठी में मुख्य रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के विभिन्न कॉलेजों के 50 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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दिन भर चली इस विचार-शृंखला में अलग-अलग सत्रों के माध्यम से युवाओं को स्वामी जी के जीवन दर्शन से परिचित कराया गया। गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए मुख्य वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विवेकानंद जी के लिए "धर्म" केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि दरिद्र नारायण की सेवा था। दिल्ली विश्वविद्यालय के 50 मेधावी विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा भर दी। इन छात्रों ने न केवल वक्ताओं को सुना, बल्कि "आज के दौर में विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता" विषय पर अपने विचार भी साझा किए। विद्यार्थियों ने चर्चा के दौरान यह संकल्प लिया कि वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए साप्ताहिक समय समर्पित करेंगे।
प्रांत कार्यालय में हुई इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा "सेवा कार्य" रहा। गोष्ठी में इस बात पर गहन मंथन हुआ कि कैसे युवा छात्र शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में वालंटियर (स्वयंसेवक) के रूप में योगदान दे सकते हैं। वर्तमान में तकनीक और नवाचार के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान कैसे निकाला जाए, इस पर भी छात्रों ने प्रेजेंटेशन दिए।
आज जब भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, तब स्वामी विवेकानंद के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। प्रांत कार्यालय में आयोजित यह गोष्ठी केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति की शुरुआत है। 50 छात्रों का यह समूह जब कैंपस में वापस जाएगा, तो वे अपने साथ सेवा और राष्ट्रभक्ति की वह मशाल लेकर जाएंगे, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगी।

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