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शिवाजी कॉलेज के छात्रों ने सेवा भारती के बच्चों के साथ मनाई मकर संक्रांति

  • 2026-01-16 05:29:20
परंपरा और आधुनिकता का मिलन मकर संक्रांति का पर्व केवल सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज में मिठास और समरसता घोलने का अवसर भी है। इसी पावन संकल्प के साथ, कल 14 जनवरी को शिवाजी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के छात्र और छात्राओं ने एक अनूठी पहल की। कॉलेज के इन युवाओं ने अपना समय और खुशियाँ उन बच्चों के साथ साझा कीं, जो समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की आकांक्षा रखते हैं। सेवा भारती के प्रकल्प में आयोजित इस मिलन समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति कितनी सजग है।

कार्यक्रम की शुरुआत एक औपचारिक सत्र से नहीं, बल्कि एक आत्मीय संवाद से हुई। शिवाजी कॉलेज से आए विद्यार्थियों ने बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की। शुरुआत 'परिचय सत्र' से हुई, जहाँ कॉलेज के छात्रों ने अपना परिचय दिया और बच्चों के सपनों के बारे में जाना। इस अनौपचारिक संवाद ने बच्चों के मन से झिझक को पूरी तरह समाप्त कर दिया और वे अपार उत्साह के साथ अपनी बातें साझा करने लगे।

युवाओं ने बच्चों को मकर संक्रांति के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे यह पर्व पूरे भारत में अलग-अलग नामों (पोंगल, बिहू, लोहड़ी) से मनाया जाता है और यह हमें प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है।

इसी क्रम में, युवाओं ने बच्चों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके सेवा कार्यों के बारे में जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। बच्चों ने भी बड़ी चतुराई और उत्साह के साथ उत्तर दिए। तत्पश्चात, विद्यार्थियों ने बच्चों को संघ के स्थापना के उद्देश्य, समाज सेवा के संकल्प और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के बारे में विस्तार से बताया। यह सत्र केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के मन में राष्ट्रवाद के बीज बोने का माध्यम बना।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और ऊर्जावान हिस्सा तब आया जब बच्चों ने अपना सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। प्रकल्प के छोटे-छोटे बच्चों ने देशभक्ति गीतों, कविताओं और लोक नृत्यों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उनकी सादगी और आत्मविश्वास को देखकर शिवाजी कॉलेज के छात्र मंत्रमुग्ध रह गए। युवाओं ने बच्चों की कला की मुक्त कंठ से सराहना की और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

उत्सव का आनंद तब दोगुना हो गया जब शिवाजी कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपने साथ लाई गई सामग्री बच्चों के बीच वितरित की। मकर संक्रांति के पारंपरिक मिष्ठान (तिल-गुड़) और अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। युवाओं ने स्वयं अपने हाथों से बच्चों को भोजन परोसा, जो समरसता और अपनत्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण था।

समारोह के अंत में सभी विद्यार्थियों और बच्चों ने मिलकर यादगार तस्वीरें खिंचवाईं। विदाई के समय माहौल भावुक था, लेकिन युवाओं ने बच्चों को विश्वास दिलाया कि यह केवल एक दिन का दौरा नहीं है। शिवाजी कॉलेज की टीम ने वादा किया कि वे आगे भी निरंतर इन बच्चों के बीच आते रहेंगे। उन्होंने आगामी दिनों में बच्चों के लिए एक विशेष शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का भी संकल्प लिया, ताकि बच्चों के कौशल विकास में सहयोग दिया जा सके।


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