News Details
स्वामी विवेकानंद धाम छात्रावास में निधि रस्तोगी जी ने छात्रों को दिया सफलता और समरसता का मूलमंत्र
- 2026-01-16 01:06:04
श्रीमती निधि रस्तोगी जी ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के उन कालजयी विचारों से की, जो युवाओं को 'उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको' का संदेश देते हैं। उन्होंने केवल किताबी ज्ञान की बात नहीं की, बल्कि विभिन्न महापुरुषों की आत्मकथाओं से जुड़े ऐसे प्रसंग सुनाए, जो छात्रों के मन-मस्तिष्क में गहराई तक उतर गए।
उन्होंने बताया कि कैसे महापुरुषों ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने संकल्प के बल पर समाज को नई दिशा दी। इन प्रसंगों के माध्यम से बच्चों को यह सीख मिली कि असफलता केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं।
संपादकीय दृष्टि से इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 'सामाजिक समरसता' रहा। निधि माताजी ने समुद्र की गहराई जैसी गंभीरता के साथ इस विषय को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि समाज का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब हम जाति, पंथ और वर्ग के भेदों को भुलाकर एक-दूसरे के पूरक बनें। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे छात्रावास से ही समरसता के भाव को जिएं, ताकि भविष्य में एक अखंड और समरस भारत का निर्माण हो सके।
"स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है," इस सूत्र को विस्तार देते हुए निधि जी ने योग और प्राणायाम के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के इस दौर में मानसिक तनाव से बचने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए योग एकमात्र सशक्त माध्यम है। उन्होंने बच्चों को कुछ सरल योगाभ्यास और उनके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी, जिससे छात्र अपने दैनिक जीवन में अनुशासन और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे सकें।
सत्र के दौरान केवल उपदेश नहीं दिए गए, बल्कि एक संवाद स्थापित किया गया। निधि माताजी ने सामान्य ज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और छात्रों को जागरूक नागरिक बनने के लिए अपने आसपास की घटनाओं और वैश्विक परिवर्तनों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उनके व्याख्यान की गहराई ऐसी थी कि छोटे बच्चों से लेकर बड़े छात्रों तक, सभी मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
प्रवास के अंत में छात्रावास का दृश्य अत्यंत उत्साहजनक था। बच्चों के चेहरों पर एक नई चमक और पढ़ाई के प्रति एक नया संकल्प दिखाई दिया। निधि माताजी की ममतामयी वाणी और गंभीर ज्ञान ने छात्रों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया। छात्रावास के प्रबंधकों ने बताया कि इस प्रकार के प्रवास से बच्चों को घर जैसा वातावरण और मार्गदर्शन प्राप्त होता है, जो उनकी शैक्षणिक प्रगति में सहायक सिद्ध होता है।
सेवा भारती के प्रकल्पों का मूल उद्देश्य ही 'नर सेवा, नारायण सेवा' है। स्वामी विवेकानंद धाम छात्रावास में निधि रस्तोगी जी का यह प्रवास उसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जहाँ समाज का प्रबुद्ध वर्ग आगे आकर नई पीढ़ी के भविष्य को संवारने में अपना योगदान दे रहा है। कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रभक्ति के गीत गाए और निधि माताजी का आभार व्यक्त किया। इस प्रवास ने न केवल छात्रों को बौद्धिक रूप से समृद्ध किया, बल्कि उन्हें एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में भी प्रेरित किया।



