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विराट हिंदू सम्मेलन स्वामी विवेकानंद दिल्ली छात्रावास के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
- 2026-02-06 02:10:38
स्वामी विवेकानंद दिल्ली छात्रावास के युवा छात्रों ने ढोलक की थाप और जोश भरे नारों के साथ मंच संभाला। इन छात्रों ने 'पर्यावरण संरक्षण: हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी' विषय पर एक मर्मस्पर्शी नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। हजारों की संख्या में उपस्थित जनसैलाब के बीच, छात्रावास के छात्रों ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती—पर्यावरण संकट—की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। नाटक के माध्यम से दिखाया गया कि कैसे आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी नदियों, पहाड़ों और वृक्षों को नष्ट कर रहे हैं, जिन्हें हमारी संस्कृति में 'देवता' तुल्य माना गया है।

नाटक के प्रमुख दृश्य और संदेश:
1. प्रकृति पूजा बनाम दोहन: छात्रों ने बखूबी दर्शाया कि सनातन धर्म में पीपल, तुलसी और बरगद की पूजा के पीछे गहरा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व है।
2. जल ही जीवन है: नदियों के बढ़ते प्रदूषण और गिरते जलस्तर पर चिंता जताते हुए छात्रों ने जल संचयन का आह्वान किया।
3. प्लास्टिक मुक्त समाज: नाटक के एक हिस्से में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और उससे होने वाली तबाही को व्यंग्यात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
नाटक के सूत्रधार ने स्वामी विवेकानंद के उन विचारों को भी रेखांकित किया जहाँ वे मनुष्य के भीतर के देवत्व को जगाने की बात करते हैं। छात्रों ने संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा करना ही वास्तव में ईश्वर की सच्ची सेवा है। युवाओं के इस अभिनय और उनकी बुलंद आवाज ने सम्मेलन में मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया। विराट हिंदू सम्मेलन के आयोजकों और प्रमुख संतों ने छात्रों की इस पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं का इस प्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़ना राष्ट्र के उज्जवल भविष्य का संकेत है। प्रस्तुति के अंत में हजारों लोगों ने हाथ उठाकर पर्यावरण बचाने और पौधारोपण करने का संकल्प लिया।
